
खलारी में मौत का ‘साइलो’, विकास के नाम पर मजदूरों की बलि ले रहा मधुकॉन प्रोजेक्ट।।
“प्रबंधन की खूनी लापरवाही: एक सुखदेव की मौत के बाद अब दूसरे सुखदेव की कमर टूटी, राज दबाने के लिए मजदूर को ‘बंधक’ बनाने का आरोप”
रिपोर्टर/राशीद अंसारी
खलारी। सीसीएल एनके एरिया की केडीएच परियोजना में निर्माणाधीन मधुकॉन कंपनी का साइलो प्रोजेक्ट अब विकास की गाथा नहीं, बल्कि मजदूरों के खून से सनी दास्तां लिख रहा है। प्रबंधन की संवेदनहीनता और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने का आलम यह है कि यहाँ मौत और जख्मों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
“हादसे दर हादसे, फिर भी ‘कुंभकर्णी नींद’ में प्रबंधन”
बीते 4 नवंबर को सुखदेव गंझू की मौत और फिर वीरेंद्र राम के घायल होने की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि मंगलवार को एक और बड़ा हादसा हो गया। हजारीबाग निवासी मिस्त्री सुखदेव सिंह (40) सब-स्टेशन-सी में प्लास्टर के दौरान ऊंचाई से सीधे सिर के बल नीचे गिर पड़े।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो:
सुखदेव के सिर का पिछला हिस्सा बुरी तरह फट गया है।
कमर में गंभीर चोट के कारण वे हिलने-डुलने की स्थिति में भी नहीं हैं।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, खून से लथपथ मजदूर को देखकर भी प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा।
“इलाज के नाम पर ‘बंधक’ बनाने का आरोप”
चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर हादसे को फाइलों में दफन करने की साजिश रची गई। आरोप है कि साइट एचआर अंकुर ने मामले को दबाने के लिए गुपचुप तरीके से ‘श्री राज हॉस्पिटल’ में प्राथमिक ड्रेसिंग कराई और घायल सुखदेव सिंह को वापस कैंप ले जाकर ‘बंधक’ बना लिया। चर्चा है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि बाहरी दुनिया और मीडिया को इस खूनी लापरवाही की भनक न लग सके।
“8 से 8 की शिफ्ट, मौत से खेलने को मजबूर मजदूर”
प्रोजेक्ट साइट पर मजदूरों का शोषण चरम पर है। सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक, बिना किसी सुरक्षा हेलमेट या बेल्ट के, मजदूरों को ऊंचाइयों पर धकेला जा रहा है। सुरक्षा के तमाम वादे कागजी साबित हुए हैं। मधुकॉन प्रबंधन के लिए मजदूरों की जान की कीमत महज एक संख्या बनकर रह गई है।
“ईंट से ईंट बजा देंगे”: मजदूर नेता अब्दुल्ला अंसारी की दहाड़
मजदूरों पर हो रहे इस अमानवीय अत्याचार के खिलाफ मजदूर नेता अब्दुल्ला अंसारी ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को डकरा में आयोजित बैठक में उन्होंने प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा, “नोटिस से भागने वाला प्रबंधन अब मजदूरों के आक्रोश से नहीं बच पाएगा। यह प्रोजेक्ट अब ‘डेथ वारंट’ बन चुका है।” >
बड़ा ऐलान: 31 जनवरी को विशाल घेराव होगा। अंसारी ने साफ कर दिया है कि अब समझौता नहीं, आर-पार की लड़ाई होगी।
मुख्य बिंदु जो सवाल खड़े करते हैं:
- सुरक्षा मानकों (Safety Norms) की अनदेखी बार-बार क्यों हो रही है?
- घायल मजदूर को बेहतर अस्पताल ले जाने के बजाय कैंप में क्यों छिपाया गया?
- बार-बार हो रहे हादसों के बावजूद सीसीएल एनके एरिया प्रबंधन मधुकॉन पर नकेल क्यों नहीं कस रहा?
खलारी एन के एरिया की जनता और मजदूर संगठनों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। अब सबकी नजरें 31 जनवरी के आंदोलन पर टिकी हैं।








